एक कॉन्फरेंस के किसी चालू सेशन में कब नींद आयी पता नही चला। आँखे खुली तो देखा हमारे अलावा कुछ और लोग भी उस हॉल में मौजूद थे। मतलब, सहभागियों के अलावा कुछ और लोग। वह अलग थे। सुनहरे, कंधों तक लंबे खुले बाल, कपड़े ना के बराबर, मतलब मोगली की याद दिलाने वाले। कुर्सियों पर बैठने की जगह मेजों पर चढ़कर बैठे थे, वह भी बंदरों के अंदाज में। और सहमें हुए से यहाँ-वहाँ देख रहे थे। उनकी नजरों में संभ्रम साफ दिखाई दे रहा था।
एक-दूजे से दूर अलग अलग केबिन्स में मास्क्स पहनके बैठे हम सहभागियों की इशारों में ही बातचीत हुई, कुछ देर बिना कुछ किये उन्हें शांत होने का वक़्त दिया जाए यह तय हुआ। और हम ध्यान से उनका वर्तन जाँचने लगे।
तभी पीछे से सुरक्षा दल हाथों में सैनिटाइजर स्प्रे लेकर दौड़ते हुए आए और सारी कहानी हमारी नजरों के सामने जैसे साफ हो गयी।
ये जो तीन मोगली-समान लोग अचानक सामने आए थे, वह उनकी दुनिया से अलग होकर गलती से हमारी दुनिया में पहुंचे थे। यहां सब कुछ नया देख डर गए और बाहर का रास्ता ढूंढते ढूंढते इस हॉल में आ पहुंचे थे।
यहाँ 2020 में विश्वव्यापी महामारी का आलम चल रहा था। सब जगहों पर सुरक्षित सूट्स पहने सुरक्षा कर्मचारी, स्वास्थ्य कर्मचारी और स्वच्छता कर्मचारी दिन-रात सारी जगहों को नागरिकों के लिए सार्स-कोविड विषाणु-मुक्त रखने की कोशिश में लगे थे। अचानक जब यह मोगली-समान लोग हवा में प्रकट हुए, वह सब सतर्क हो गए। कब, कहाँ से, कैसे, क्यों इन सवालों के जवाब ढूंढने से पहले इन बिनबुलाए मेहमानों को नियमों के अंतर्गत स्वच्छ करना जरूरी था।
और आँखें खुल गयी। इस बार वास्तव में। शुक्र है, यह बस एक सपना ही था। इन्सान न जाने कब से स्वप्नों के अर्थ जानने बेताब रहा है। सपनों में देखी वस्तुओं को भविष्य में घटने वाली घटनाओं की चेतावनी के रूप में कई बार देखा गया है। पूर्वगामी पीढ़ी के कुछ बुजुर्गों से स्वप्न में कौन सी वस्तु या किसी प्रतिकात्मक घटना का दिखना शुभ या अशुभ होता है इस तरह की जानकारी हम सबको मिलती आयी है। पिछले कुछ दशकों में इन्सान स्वप्नों का वैज्ञानिक विश्लेषण करने में कुछ प्रमाण में कामयाब रहा है। १९ वी शताब्दी के अंत में स्नायु-विशेषज्ञ व मनोविश्लेषण शास्त्र के जनक सिग्मंड फ्रायड व उनके शिष्य कार्ल युंग ने इंसान की नींद और सपनों का वैज्ञानिक विश्लेषण करना आरंभ किया।
मनोविश्लेषण विज्ञान के सिद्धांतों के अनुसार अगर हम अपने सपनों का अवलोकन करें तो समझ आता है, वह हमेशा दिन-भर में घटी किसी न किसी घटना, मिले व्यक्ति या हमारे दिमाग में चलें विचारों से सम्बंधित होते है।
✍🏼©️सोनल थोरवे
संदर्भ:https://www.scientificamerican.com/article/the-science-behind-dreaming/
https://kids.frontiersin.org/article/10.3389/frym.2019.00140

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