| जो बीत रही है दिल पे वोही उतर रही है कलम से अल्फ़ाज बन कर वरना ख़ामोशी ही हमारी हमराज़ रहा करती है... आजकल कागज़ पे सियाही उमटकर बोलने लगी है बहोत कुछ वरना हमारी जुबाँ भी तो चुप सी रहा करती है...l |
-
:)
सोनल
| जो बीत रही है दिल पे वोही उतर रही है कलम से अल्फ़ाज बन कर वरना ख़ामोशी ही हमारी हमराज़ रहा करती है... आजकल कागज़ पे सियाही उमटकर बोलने लगी है बहोत कुछ वरना हमारी जुबाँ भी तो चुप सी रहा करती है...l |