पल...
गुज़रते रहतें हैं
अपनी रफ़्तार क़ायम रखे
वक़्त बहता रहता है।
वक़्त बहता रहता है।
एक छोटेसे तिनके की तरह हलकेसे
इस वक़्त की नदिया में आ कर गिरतें हैं।
थोड़ासा उम्र का फ़ासला काँटते हैं बस्
और इसी नदिया में कहीं ग़ुम हो जातें हैं।
इस छोटेसे फ़ासले में
जानें क्या क्या कर गुजरतें हैं।
जानें क्या क्या कर गुजरतें हैं।
आगे बढ़ते बढ़ते कई दफा गिरतें हैं,
उठतें हैं, रुकतेँ हैं, दौड़तेँ हैं
पर सफ़र पूरा कर ही दम लेते हैं...
नहीं,
असल में दम छोड़तें हैं।
असल में दम छोड़तें हैं।
इस छोटेसे सफ़र को कई सारे टुकड़ों में बाँट देतें हैं हम
एक टुकड़ा नए साल के नाम से जाना जाता है।
साल...
हर साल बदलता है।
वैसे तो हर पल कुछ नयी सीख़ दे कर जाता है,
मगर हर साल दिसंबर में 31 को लोगों को सब याद
आता हैं।
पक्के कच्चे, बुरे अच्छे सारे पल,
सारी यादें जैसे इस एक दिन में सिमटी सी जाती
हैं।
पूरा गुज़रता साल कुछ ही पलों में हम मुड़कर देखतें
हैं।
मुस्कुराहटें, आंसू, ग़म और खुशियाँ
सारे जैसे एक साथ नम हो जातें हैं।
इन्हें यूँही बुत बन कर देख सकते हैं हम।
हम...
चौकट पर आ कर गुज़रते साल का हाथ छोड़ते
नए सवेरे की ऊँगली थामने बेक़रार रहतें हैँ।
पल...
गुज़रते रहतें हैँ
हम भी बढ़तें रहतें हैँ इनकी तरंगों पर।
खोना तो होता ही है सब को, इस सफ़र में किसी मुकाम
पर...
और हम, नयी मंज़िलें ढूँढते रहतें हैं।
एक दिन एक
छोटेसे बुलबुले की तरह हलकेसे
इस वक़्त की
नदिया से हम उड़ भी जातें हैं।
पल गुज़रते रहतें
हैं,
अपनी रफ़्तार
क़ायम रखे वक़्त बहता रहता है।
हम चौकट पर आ कर गुज़रते साल का हाथ छोड़ते,
हम चौकट पर आ कर गुज़रते साल का हाथ छोड़ते,
नए सवेरे की ऊँगली थामने बेक़रार रहतें हैँ।
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नये साल की शुभकामनाएँ।
सोनल
:)
नये साल की शुभकामनाएँ।
सोनल
:)


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